योग के बारे में जाने, इतिहास और इसके प्रकार

योग के बारे में जाने, इतिहास और इसके प्रकार

योग एक प्राचीन पद्धति है जो की भारत और नेपाल में एक आधात्मिक प्रकिर्या को कहते है जिसमे मन शरीर और आत्मा को एक साथ लाने काम होता है. योग के माध्यम से शरीर और मन को पूर्ण रूप से स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है, योग शब्द और इसकी धारणा बोद्ध धर्म हिन्दू धर्म में ध्यान लगाने से सम्बधित है.भगवत गीता में भी योग शब्द का कई बार प्रयोग किया गया है. अगर आपका शरीर मन और आत्मा तीनो स्वस्थ है तो आप स्वस्थ महसूस करते है.

विष्णुपुराण के अनुसार जीवात्मा और परमात्मा का मिलन ही योग है. वर्तमान समय में लोग अपनी व्यस्त जीवन शैली के कारण संतोष पाने के लिए योग करते है. योग से ना सिर्फ तनाव दूर होता है इसके साथ साथ मन और शरीर को शांती महसूस होती है. आज कल लोग मोटापे से बहुत परेशान है उनके लिए योगा बहुत ही फायदेमंद है आज योग के फायदे का सभी को पता है तभी तो योग दुनिया भर में प्रचलित है.

योग के बारे में जाने, इतिहास और इसके प्रकार

योग के बारे में जाने, इतिहास और इसके प्रकार

योग के प्रकार:-

योग को 4 अलग अलग भागो में उनके काम के अनुशार बाँटा गया है.

  • मन्त्रयोग:- इस योग में मन्त्र का उचार्ण किया है और इसको आगे चार भागो में बाँटा गया है
    (1) वाचिक (2) मानसिक (3) उपांशु (4) अणपा
  • हठयोग/अष्‍टांग योग:- इसमें ह को सूर्य और ठ को चन्द्र के समान माना गया है सूर्य और चन्द्र की समान आसन ही  हठयोग है। शरीर में कई हजार नाड़ियाँ है उनमें तीन प्रमुख नाड़ियों का का बताया गया  है सूर्यनाडी यानि की पिंगला जो दाहिने स्वर का प्रतीक है। चन्द्रनाडी यानि की  इड़ा जो बायें स्वार का प्रतीक है। इन दोनों के बीच तीसरी नाड़ी सुषुम्ना है। हठयोग/अष्‍टांग योग को नो प्रकार में
    बाँटा गया है.
    (1)यम (2)नियम (3)आसन (4)प्राणायाम (5)प्रतिहार (6)प्रत्‍याहार (7)धरना (8)ध्‍यान (9)समाधि
  • लय योग/कुंडलिनी योग:- हर समय चलते,उठते,बैठते,खाना खाते भगवान् का ध्यान करने को लय योग कहा गया है.
  • राजयोग:- राजयोग को सभी योगो का राजा माना जाता है महर्षि पतंजलि के अनुसार समाहित चित्त वालों के लिए अभ्यास और वैराग्य और विक्षिप्त चित्त वालों के लिए क्रियायोग का सहारा ले कर आगे बढ़ने रहने का रास्ता बताया गया है.